गुफा जो हमसे छिपाई जाती है


कैलाश मंदिर जिसे दुनिया का सबसे रहस्यमई मंदिर कहा जाता है ये मंदिर देखने में जितना अद्भुत नजर आता है ये मंदिर उतना ही रहस्यमई है इसके बनाने की कला बेहत ही अजीब थी इसमे जितने राज इस मंदिर से जुड़े है उससे कई ज्यादा राज इसके निचे जाती गुफाओं से जुड़े है आपको इतिहास में इन गुफाओ के बारे में कई कहानिया मिल जाएगी लेकिन इसे सरकारी तौर पर बंद करवाया गया है और इससे ये सवाल भी उठता है की कैलाश मंदिर के गुफाओ में कैसा राज दफ़न है जो सरकार भी इसे छिपा रही है दरहसल ऐसा माना जाता है की कैलाश मंदिर का निर्माण आठवी सताब्दी में करवाया गया था लेकिन कई खोजकर्ता इसे कई हजारो साल पुराना मानते है इसके बनाने वाले का नाम जाकारी से कृष्ण प्रथम ने बनवाया था और कृष्णा प्रथम को एक गंभीर बोमारी थीं तो उनकी पत्नी ने भगवान् शिव से माँगा अगर उनका पती ठीक हो जाए तो यहाँ वो मंदिर बनवाएगी और जब तक मंदिर का शिखर नहीं देख लेंगी तब तक वो व्रत रखेंगी उसके बाद राजा कृष्णा प्रथम ठीक हो गए और वो जब मंदिर बनवाने लगे उनको बताया गया ऐसा मंदिर बनवाने में सालो लग जायेंगे और आप इतना लम्बा वृत नहीं रख पाएंगी तब उन्होंने भगवान् शिव से माँगा की वे उनकी मदत करे तब उनकी अस्त्र प्रदान हुवा उसे भूमि अस्त्र कहते है इसीसे इस चट्टान पर मंदिर ऊपर से निचे के और बनाया गया इस मंदिर का शिखर कुछ ही दिनों में देखा जा सका जो काम मजदूरो द्वारा दोसो साल में होता वो काम भूमि अस्त्र से कुछ ही समय में हो गया ऐसा कहा जाता है की ये अस्त्र मिटटी को भाप बना देता था इसके बाद इस अस्त्र को राजा ने मंदिर के गुफाओं में दफ़न कर दिया साल १८७६ में इंग्लेंड की एक खोज कर्ता एमा हेंड्रिक ने अपनी किताब में कैलाश मंदिर की गुफाओं के बारे में लिखा था की ये मदिर बहार जैसा दिखत है ये उससे भी बड़ा है

उनक ये कहना है की ये मंदिर इतना बड़ा नहीं है जितना वे बहार से दीखता है बल्कि इन गुफाओं के निचे इससे भी बड़ा और विशाल निर्माण करवाया गे है इसके बाद भी इस मंदिर के कई खोजकर्ता ने बताया है की उनका ये कहना है की वह हाई रेडिओ एक्टिविटी है जहा ज्यादा समय नहीं बिताया जा सकता लकिन ये पूरी जगह पर नहीं फैली है बल्कि ये ये मंदिर के निचे किसी एक श्रोत से आ रही थी जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर कब्ज़ा किया तब उन्होंने ऐसे ही प्राचीन ऐतिहासिक जगह को अपने कब्जे में कर लिया और यहाँ सिर्फ इंग्लिश खोजकर्ता को ही जाने की अनुमति थीं भारत के कई विशेशग्यो का मानना है की अंग्रेजो ने भारत की कई विकसित चीजो को चुराया और इसी के साबुत हम कैलाश मंदिर के गुफाओं में धुड सकते है लेकिन इनको भारत के आजादी से पहले ही बंद किया गया और इनकी खोज को भी मिटा दिया गया लेकिन आजादी के सत्तर साल बाद भी इनको बंद कर दिया गया है और इसपर सरकारी तौर पर रोक लगाईं गई है इनका कारण ही इन गुफाओं का ढलान बताया गया है इन सभी बातो से ये साबित होता है की यहाँ की गुफाओं में कई राज दफ़न है और ऐसा भी हो सकता है की वह आज भी वही अस्त्र मौजूद हो जिनकी मदत से इनका निर्माण करवाया गया 

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